राम स्वरुप सिंह उर्फ़ मजिस्ट्रेट साहब!

अपनी बौद्धिक शक्ति का लोहा मनवाते हुए, आजादी के बाद आपका चयन बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के रूप में हुआ। इस दौरान बिभिन्न पदों पर रहते हुए आपने अपनी कार्यकुशलता से कई सराहनीय कार्य किए। बाद के वर्षों में आप मजिस्ट्रेट के रूप अपनी सेवाएं देते हुए सेवानिवृत हुए। मजिस्ट्रेट के पद पर रहते हुए आपके द्वारा कई ऐसे निर्णय सुनाये गए जो आज भी इतिहास के पन्नों आज भी सुनहरे अक्षरों में अंकित है। इस दौरान मोकामा के लोगों के भी कई मामले आपके अंतर्गत आये जिसपर आपने कई बेहतरीन निर्णय सुनाये थे। अपने कार्यकाल के दौरान आप एक ईमानदार और कड़क अधिकारी के रूप में पुरे बिहार में चर्चित हुए।
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इसके साथ ही आपने सामाजिक उत्तरदायित्व के भी कई सराहनीय उदाहरण अपने जीवन में प्रस्तुत किए। स्वतंत्रता आन्दोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को जब भारत सरकार ने पेंशन देना आरम्भ किया तो आपने सरकार से मिलने वाली उस पेंशन राशि को विनम्रता पूर्वक अस्वीकार कर दिया। 30 नवम्बर 2001 को आपका निधन मोलदियार टोला स्थित निवास स्थान पर हुआ। अपने पूरे जीवन काल में आपने कई सामाजिक जिम्मेदारियों को बखूबी अंजाम दिया।
मोकामा को ऐसे महान सपूत पर गर्व है, जिसके पदचिन्हों पर चलकर आने वाली पीढ़ी कई कृतिमान स्थापित कर सकती है।